• AAZAAD

आज़ाद की संस्कृत फिल्म 'अहम् ब्रह्मास्मि' विश्व सिनेमा को एक नई दिशा देगी

भारतीय सिनेमा के स्तंभ पुरूष और द बॉम्बे टॉकीज स्टूडियोज के जनक राजनारायण दूबे की ऐतिहासिक फिल्म निर्माण कंपनी "बॉम्बे टॉकीज़” ने कामिनी दुबे के साथ मुख्य धारा की, पहली संस्कृत फिल्म "अहम् ब्रह्मास्मि" का निर्माण करके एक बार फिर सिनेमा इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करवा दिया है. ११ जून को इस फिल्म के पहले गाने "वन्दे मातरम्” के साथ ही फिल्म के पोस्टर का भी विमोचन हुआ.

लेखक, निर्देशक ,संपादक आज़ाद के अनुसार संस्कृत सैकड़ों भाषाओं की जननी है . भारत में ही नहीं विदेशों में भी इस पर शोध किया जाता है, बावजूद इसके संस्कृत भाषा जन साधारण में कोई स्थान नहीं रखती. द बॉम्बे टॉकीज़ स्टुडिओ ने संस्कृत भाषा की फिल्म बनाने में समर्थन,सहयोग दिया, इसके लिए वह आभारी है.

अहम् ब्रह्मास्मि मुख्य धारा की फिल्म बनाने का एक ही उद्देश्य है, मृत प्रायः हो चुकी देव भाषा संस्कृत को पुनर्जीवित करना और विश्व के कोने- कोने में पहुँचाना. भारत में इस फिल्म के प्रदर्शन होने के साथ ही विदेशों में जैसे लन्दन, न्यूयार्क, पेरिस, बर्लिन, मास्को और अन्य जगहों पर प्रदर्शित होगी. इससे भारत की संस्कृति और सभ्यता का प्रचार - प्रसार होगा.

कामिनी दुबे के अनुसार यह खुशी दोगुनी है, जहाँ उनकी संस्कृत फिल्म "अहम् ब्रह्मास्मि" का पोस्टर विमोचन किया गया वहीँ उन्हें इस बात का गर्व है, कि उनकी फिल्म "राष्ट्रपुत्र" को कांन्स फिल्म फेस्टिवल समाहरोह में विशेष सम्मान का दर्जा मिला। इससे भी सम्मानजनक बात यह रही की, उन्हें पहली महिला निर्मात्री होने का सम्मान हासिल हुआ क्योंकि भारत के किसी भी क्रांतिकारी पर बनी फ़िल्म कांस में रिलीज़ नहीं हुई है, बॉम्बे टॉकीज, कामिनी दूबे और आज़ाद की फ़िल्म राष्ट्रपुत्र कांस में रिलीज़ होने वाली पहली क्रांतिकारी फ़िल्म है. उक्त अवसर पर आज़ाद की अंतरराष्ट्रीय सफलता के लिए बॉम्बे टॉकीज़ की ओर से प्रतिक कुमार ने वाग्देवी के स्मृतिचिन्ह के साथ आज़ाद का सम्मान किया |

चंद्रशेखर आज़ाद के विचारों पर आधारित फिल्म राष्ट्रपुत्र के साथ लगभग ६ दशक बाद महान फ़िल्म कंपनी "द बॉम्बे टॉकीज स्टूडियोज" ने शानदार वापसी के बाद उनकी फिल्म कांन्स फिल्म फेस्टिवल समाहरोह में शामिल हुई, यह अपनेआप में सम्मानजनक और भारत के लिए भी गौरव की बात है.

लेखक, निर्देशक, संपादक आज़ाद स्वयं भी चंद्रशेखर आज़ाद के विचारों से प्रभावित हैं और उन्होंने अपनी शिक्षा भोंसला मिलिट्री स्कूल से हासिल की, यही कारण है कि उनके निर्देशन में बनी इस फिल्म को एक खुबसूरत और क्रांतिकारी पहचान मिली.


"द बॉम्बे टॉकीज स्टूडियोज" ने अछूत कन्या (1936) जैसी फिल्म बनाकर जाति, धर्म, भाषा का बंधन तोड़ा। उसी परंपरा को कायम रखते हुए आज़ाद ने संस्कृत में मुख्य धारा के लिए "अहम् ब्रह्मास्मि" बनाकर भाषा-भाषी के बंधन को तोड़ा.

"अहम् ब्रह्मास्मि" विश्व सिनेमा के लिए एक कालजयी और यादगार फिल्म होगी.


For media inquiries,

+919322411111  |  info@bombaytalkies.co

1 Ghanshyam Dube Tower, M G road,

Borivali – East, Mumbai – 400066.

Maharashtra, India

Get in touch

+919322411111
info@bombaytalkies.co

©  all rights reserved

  • Facebook
  • Twitter
  • Instagram